आरवली पर्वत की 10 प्रमुख विषेसताएं जिसका सुरक्षित होना जरुरी है।

फोटो :- AI

1. प्राचीनतम पर्वत श्रेणी

आरवली दुनिया की सबसे पुरानी पर्वत शृंखलाओं में गिनी जाती है (लगभग 1500–2500 मिलियन वर्ष पुरानी)।

2. भौगोलिक विस्तार –

यह गुजरात से शुरू होकर राजस्थान होते हुए हरियाणा और दिल्ली तक लगभग 700–800 किमी तक फैली है।

3. मरुस्थल से सुरक्षा कवच –

थार मरुस्थल को पूर्व की ओर फैलने से रोकती है, इसलिए यह “ग्रीन वॉल” की तरह काम करती है।

4. जल स्रोतों की जननी


बनास, लूणी, साहिबी जैसी कई नदियाँ यहीं से निकलती हैं और भूजल रिचार्ज में मदद करती हैं।

5. जैव विविधता का केंद्र –

यहाँ कई वनस्पतियाँ, औषधीय पौधे, पक्षी और वन्यजीव पाए जाते हैं।

6. जलवायु संतुलन –

आरवली मानसून को प्रभावित कर वर्षा में मदद करती है और तापमान संतुलन बनाए रखती है।

7. मिट्टी संरक्षण –

पहाड़ियाँ और वन कटाव (soil erosion) को रोककर उपजाऊ मिट्टी बचाते हैं।

8. खनिज संपदा –

यहाँ तांबा, जस्ता, संगमरमर आदि मिलते हैं, लेकिन अंधाधुंध खनन से नुकसान हो रहा है।

9. ऐतिहासिक व सांस्कृतिक महत्व –

कई प्राचीन सभ्यताएँ, किले और धार्मिक स्थल आरवली क्षेत्र में स्थित हैं।

10. जनजीवन का आधार –

राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली NCR के करोड़ों लोगों के लिए पानी, हवा और पर्यावरण का समझ है।

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